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अब्राहमी धर्म:ना कोई गुरु ना कोई ग्रंथ 21वीं शताब्दी का नया धर्म अमेरिका ने अपने फायदे के लिए बनवाया

अब्राहमी धर्म : ना कोई गुरु ना कोई ग्रंथ 21वीं शताब्दी का नया धर्म अमेरिका की सहायता से बना

अब्राहमी धर्म : ना कोई गुरु ना कोई ग्रंथ 21वीं शताब्दी का नया धर्म अमेरिका की सहायता से बना

BY MANJEET         25/01/2024

मुस्लिम बहूल अरब देशों में कुछ समय से एक नए धर्म की बात हो रही है। यह अब्राहमी धर्म है। दिलचस्प बात यह है कि, इस नए मजहब की शुरुआत अपने आप नहीं बल्कि एक राजनीतिक बिल के तहत हुई अमेरिका इसमें मेडिएटर था। जिसने दावा किया था कि, इससे अरब देशों और इजरायल के बीच चली आ रही दुश्मनी के तार ढीले पड़ेंगे धर्म को लेकर दुनिया में कट्टरता बढ़ रही है।

 यूरोप में एक्टिव हो चुका है। जिसका कहना है कि, एक खास धर्म के शरणार्थी उनके यहां पर आकर उत्पाद मचाते हैं। कई युद्ध के मूल में भी कहीं ना कहीं रिलेशन है। यह इसराइल और यूएई के बीच संबंध सुधारने के लिए लांच हुआ था। इसराइल बहरीन और यूएई के बीच संबंध सुधारने के लिए एक समझौता हुआ जिससे अब्राहमी  समझौता कहा गया हैं। 

हाइब्रिड रिलिजन  अब्राहमी धर्म  यह समझते हैं 

 तीन धर्म इस्लाम ईसाई और यहूदी धर्म के बीच समानताओं को देखते हुए उनका फर्क मिला देना था। यानी एक तरह का हाइब्रिड रिलिजन है। जिसमें तीनों धर्मों  की थोड़ी-थोड़ी खासियत है। इसमें अमेरिका मेडिएटर बना सितंबर 2020 में इब्राहिम एकार्ड्स समझौता था। ताकि इसराइल और अरब देशों के बीच दशकों से चली आ रही टेंशन कम हो सके। अमेरिका ने इसमें मध्यस्थ की यह कागजी लिखा पड़ी थी ना की पूरी तरह से हर धर्म का ग्रंथ होता है।

लेकिन इसका कोई ग्रंथ नहीं इसका नाम इब्राहिम इसलिए दिया गया क्योंकि मुस्लिम और यहूदी दोनों ही धर्म में यह महान शख्स माने जाते रहे। यहूदी धर्म का उदय पैगंबर अब्राहमी  से हुआ माना जाता है। वही मुसलमानों में पैगंबर का एक रूप है। यहूदी और मुस्लिम तीनों ही धर्म को अब ब्राह्मी धर्म के तहत गिना जाता है। यह तीनों ही मानते हैं कि ईश्वर एक होता है।

उनके धार्मिक मान्यताएं और रीति रिवाज पर काफी मिलते जेउलटे हैं। लेकिन इनमें कई फरक भी है। जिनकी वजह से अब्राहमी में रिलिजन के कॉन्सेप्ट पर विवाद होता रहा हैं। अब यह विवाद क्या है कि, किसी धर्म की तरह यह ऑर्गेनिक तरीके से नहीं आया बल्कि राजनीतिक डील  के तहत बन के अमीर अरब इसे अमेरिका से अपने व्यापारिक रिश्ते सुधारने के लिए आजमा रहे हैं।

क्या है अब्राहमी धर्म आने का कारण  

 इजरायल के दोस्त अमेरिका ने जानबूझ कर ऐसा किया ताकि अब अब नेशन आजाद फिलिस्तीन की मांग छोड़ दें। राजनीति के बाद छोड़ भी दे तो सारे धर्म में कुछ अंतर है। जैसे ईसाईओ में खाने-पीने को लेकर कटता नहीं है। जबकि यहूदी और मुस्लिम दोनों ही धर्मों ऐसा नहीं करते  कई चीजों से परहेज करते हैं।  यहूदी धर्म में मसीहा या पैगंबर का दर्जा नहीं जबकि बाकी दोनों घर मानते हैं। यूएई और इजरायल के बीच दोस्ताना संबंध बने दोनों के बीच सीधी उड़ाने शुरू हुई।

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अबू धाबी में इजरायली दूतावास खोला गया जबकि तेल अभी में भी यूएई का दूतावास खुला इससे पहले डिप्लोमेटिक रिश्ते नहीं के बराबर थे। अब्राहमी अकॉर्ड पर जोर देने के लिए एक पूजा स्थल बनाया गया इस अब्राहम एक फैमिली हाउस नाम दिया गया चर्च मस्जिद और 2023 में खोला गया

अब्राहमिक धर्म की विचारधारा को जो लोग मानते हैं,उनका विरोध भी हो रहा है। बहुत सारे लोगों का यह भी मानना है कि,इस धर्म की स्थापना करने में कुछ देशों के प्रमुखों की राजनीतिक चल भी है। वैसे तो इस नए धर्म का मुख्य उद्देश्य अरब नेशन के साथ इसराइल के संबंध सुरक्षित करना भी है। 

विभिन्न धर्मों  का जनसंख्या के आधार पर प्रतिशत : क्रिश्चियन 33.06%,मुस्लिम 20.28%,हिंदू 13.33%,चाइनीस यूनिवर्सिटीज 6.27%,बुद्धिस्ट 5.87%,इथेनॉ रिलीजनिस्ट 3.97,न्यूरो रिलीजनिस्ट 1.68%,सिख 0.39%,और बहुत सारे धर्म है जो एक परसेंट से भी काम में आते हैं। इसके अलावा 11.92% लोग ऐसे भी हैं,जिनका कोई धर्म नहीं है। 

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