किसान आंदोलन 2024 को लेकर किसान और सरकार की क्या-क्या तैयारी

BY MANEET      12/02/2024

हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं। ताकि किसान यात्रा न कर सकें,और आंदोलन पहले जितनी  तेजी ने पकड़ सके। हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने सड़कों पर जगह-जगह किले  खुदवां दी गई है। सरकार नहीं है काम बड़े पैमाने पर किया हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि,पंजाब के जो किसान दिल्ली के लिए आंदोलन में शामिल होने के लिए आते हैं। उनको दिल्ली जाने से रोका जा सके। और आंदोलन को सफल कर सकें। 

किसान आंदोलन को लेकर किसान और सरकार की क्या-क्या तैयारी
किसान आंदोलन 2024 को लेकर किसान और सरकार की क्या-क्या तैयारी

पंजाब से किसान मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए पंजाब और हरियाणा भर से किसान रविवार से ही ट्रैक्टर ट्राली कर बाइक बेस के लंबे काफिले के साथ 13 फरवरी के लिए दिल्ली चलो जयकारा लगाते हुए,  विरोध प्रदर्शन के लिए  दिल्ली की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। पंजाब और हरियाणा के किसानों ने कहा है कि,अब की बार वह अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए जोरदार आंदोलन करने की तैयारी में है। जिसका वादा भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 में किसानों के विरोध आंदोलन को खत्म करने के लिए कहा था। की काले कानून वापस लिए जाते हैं। जो अब तक वापस नहीं हुए हैं।

किसान आंदोलन के लिया किसान क्या क्या समान ले कर निकले हैं  

पंजाब में जालंधर से लेकर हरियाणा के अंबाला सिरसा कुरुक्षेत्र हिसार  यहां से सब किसान अपने जरूरी सामान दैनिक जीवन में पूरी करने वाली सुविधाओं को लेकर दिल्ली की तरफ रवाना हो चुके हैं। ट्रैक्टरों में अपने खाने पीने का सामान तंबू लकड़ी बिस्तर सब कुछ याद कर दिल्ली चलो का नारा लगाते हुए,आगे बढ़ रहे हैं। जालंधर से लगभग470 किलोमीटर लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए किसानों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त में प्रार्थना करने के बाद 12 फरवरी को अमृतसर से ही यात्रा की शुरुआत कर दी है। 

सरकार का विरोध करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ( जो एक गैर राजनीतिक दल  है ) यह किसान मोर्चा 2021 किसान आंदोलन के बाद में नए नियुक्त हुआ है। मजदूर मोर्चा का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ किसान यूनियन नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंडित ने इस मोर्चे का गठन किया है। इसी के साथ है 2020 में किसानों के विरोध का आयोजन करने वाले देश के सबसे बड़े किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि, वह इस किसान आंदोलन में भाग नहीं ले रहे हैं। और वह 16 फरवरी को एक अन्य किसान आंदोलन के साथ सरकार के खिलाफ है। अपनी आवाज को उठाने के लिए दूसरे आंदोलन का आयोजन करेंगे। 

किसान आंदोलन को ले कार हरियाणा पुलिस 

दूसरी और हरियाणा की सरकार ने दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को रोकने के लिए मनोहर लाल की सरकार ने घग्गर नदी पर स्थित पंजाब एंड हरियाणा सीमा राजमार्ग पर 12 लेयर  के ब्रेकर ( जिसमें बेरी गेट तार कीलें और पुलिस फोर्स बल ) का निर्माण किया है। 

किसान आंदोलन को ले कार हरियाणा पुलिस 
किसान आंदोलन को ले कार हरियाणा पुलिस

इसमें हरियाणा सरकार ने ईटों से सीमेंट में चांवई  करवा कर दीवार पर बनवा दी गई है। कटीले तारों से बेरी गेट्स को ढक दिया गया है,ताकि कोई वाहन या व्यक्ति उन तक पहुंच ना सके। ट्रैक्टर वाहनों के टायरों की हवा निकालने के लिए सड़कों पर नकली कीलें  कंक्रीट में फिक्स करवा दी गई है। लोहे और पत्थर से बने वारिगेट्स को सीमेंट और कंक्रीट से भर दिया गया है। ताकि आंदोलनकारी उनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर न ले जा सके। 

हरियाणा सरकार ने किसानों को रोकने के लिए कितना इंतजाम किए हैं। सड़क मार्ग के सभी रास्ते बंद कर देने के बाद हरियाणा सरकार ने  घाघरा नदी ( घग्गर नदी ) नीचे से खोज दिया गया है। यही इसलिए किया ताकि पंजाब के किसान  हरियाणा में किसी दूसरे रास्ते से न घुस सके। हरियाणा पुलिस ने राष्ट्रीय मार्ग पर आने वाले लोगों को पहचान पत्रआधार कार्डआदि की जांच के लिए एक कार्यक्रम भी आयोजित किया है। जिससे पंजाब से आने वाले किसानों को रोकाजा सके।

 कुछ रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा पुलिस ने किसान आंदोलन को रोकने के लिए टीमों का कठिन भी किया है। यह टीम में हरियाणा के गांव में जा जाकर उनके घरों पर छापेमारी कर रही है। हरियाणा सरकार के इस उत्पीड़न से बचने के लिए हरियाणा की कई किसान यूनियन नेता पिछले लंबे समय से पंजाब में भी रह रहे हैं। हरियाणा पुलिस ने अस्थाई तौर पर दो बड़े स्टेडियमों को अस्थाई जेल में बदल दिया है। ताकि आंदोलन में आए बड़े संख्या में लोगों को गिरफ्तार करने की जरूरत पड़े तो ऐसा करने पर पुलिस को  उनको रखने के लिए कोई दिक्कत ना हो।

हरियाणा पुलिस ने सोनीपत में धारा 144 का भी ऐलान पहले से ही  किया हुआ। दूसरी और किसान आंदोलन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी धारा 144 लागू कर दी है। इस धारा के तहत लोगों को एक जगह इकट्ठा नहीं होने दिया जाएगा जुलूस और रेलिया की अनुमति नहीं होगी।

किसान आंदोलन को ले कार सरकार के साथ बैटक 

12 फरवरी को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल,अर्जुन मुंडा, नित्यानंद राय और किसान यूनियन ऑन के बीच दूसरी दूर की बैठक के लिए बुलाया है। पहली बैठक की इससे पहले 8 फरवरी को हो चुकी है। किसान मजदूर एकतानेता सरवन सिंह पांडर नेअपनी प्रतिक्रिया देते हुएयह कहा है कि, “यह हमारी मांगे नहीं है बल्कि जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा  किया गया वादा को लेकर आंदोलन है। जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा नहीं किया है। इस आंदोलन में नया कुछ भी नहीं है। 

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मोदी ने हमसे एसपी पर कानून बनाने का वादा किया था,जो हम सब किसानों का अधिकार भी है। किसानों को दोबारा विरोध करने के लिएमजबूर किया गया है। क्योंकि मोदी सरकार अपने वादे से पलट गई है। हरियाणा पुलिस के इंतजामों को लेकर किसान नेता ने यह कहा कि यह काम हरियाणा पुलिस पहले भी कर चुकी है। हम सबको पता है पहले भी क्या हुआ था।

किसानों के इस विरोध ने 2020 में हुए किसानों के आंदोलन की यादों को फिर से ताजा कर दिया है। जो तीन कृषि कानून के खिलाफ किया गया आंदोलन था। मोदी जी ने 19 नवंबर 2021 को तीन कृषि कानून को रद्द करने के बाद यह आंदोलन किसानों  ने खत्म किया था।   

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