Ladakh में क्यों हो रहा है आंदोलन कौन है सोनम वांगचुक क्या चाहते हैं लद्दाख के लोग

BY MANJEET          01/04/2024

Ladakh : सोनम वांगचुक ने 21 दिन बाद भूख हड़ताल खत्म ( जो 6 से शुरू मार्च 26 2024 ) कर दी है। सोनम चाहते थे कि लद्दाख कोपूर्ण राज्य का दर्जा और उसे छठी अनुसूची में शामिल किया जाए इसी को लेकर वह इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। दोस्तों पिछले महीने लद्दाख में 30 हजार से ज्यादा लोगों ने इकट्ठे होकर प्रोटेस्ट किया। 

Ladakh में क्यों हो रहा है आंदोलन कौन है सोनम वांगचुक क्या चाहते हैं लद्दाख के लोग
Ladakh में क्यों हो रहा है आंदोलन कौन है सोनम वांगचुक क्या चाहते हैं लद्दाख के लोग

लेकिन 30000 का मतलब है,की पूरी यूनियन टेरिटरी की 10% से भी ज्यादा पॉपुलेशन सब एक जगह पर इकट्ठे थे। अपने हक के लिए प्रोटेक्ट करने 6 मार्च के बाद भी सरकार ने लोगों की नहीं सुनी तो फेमस एजुकेटर इनवेटर और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने फैसला किया कि वह इंडेफिनिटी फास्ट पर बैठेंगे। आवाज सुनी नहीं जाती जब तक सरकार लद्दाख पर ध्यान ना दे 21 दिन का अनसन  जो एक आमरण अनशन बन सकता था। तो कितनी बड़ी खबर होगी लेकिन जिस तरीके से इस खबर को दबाया जा रहा है।   

दिन  Ladakh को खतरे में डाल रहा है जिसने हसदेव के जंगलों को तबाह कर दिया मणिपुर की पहाड़ियों में आग लगा दी बख्श वहां को तबाह करने पर तुला है वही माफिया है जिसकी वजह से जोशीमठ डूब रहा है जिसकी वजह से उत्तरकाशी की सुरंग गिरी और जिसे आज लक्षद्वीप खतरे में यह माफिया जिससे अगर रोक न गया तो देश को दीमक की तरह धीरे-धीरे खा जाएगा अंदर से खोखला कर देगा आईए यह समझते हैं। 

अगर आप नहीं जानते तो बताना जरूरी बनता है। की वही इंसान है,जिसे इंस्पायर होकर 3 ईडियट्स फिल्म में रैंचो का कैरेक्टर बनाया गया था। जो काम रैंचो ने फिल्म में किए थे। वैसे ही इन्नोवेटिव आविष्कार सोनम वांगचुक असल जिंदगी में कर चुके है। 2021 में इन्होंने इंडियन आर्मी के लिए यह एनवायरमेंट फ्रेंडली 16 हीटेड बनवाए थे। इसकी मदद से हमारे जवानों को  Ladakh की कड़कती हुई ठंड में भी एक रहने की कंफर्टेबल जगह मिल पाए इसके अलावा लद्दाख में कई सारी कार्बन न्यूट्रल सोलर बिल्डिंग को भी डिजाइन किया है।  और की का कॉन्सेप्ट भी यही लेकर आए थे।   Ladakh में डील करने के लिए इन्होंने कॉन्सेप्ट इंट्रोड्यूस किया इन आर्टिफिशियल ग्लेशियर का यही कारण है। 

क्या-क्या मांग कर रहे हैं  Ladakh लोग

ढेर सारी अवार्ड से सम्मानित किया गया चाहे वह राममोहन मार्कशीट से अवार्ड हो ग्रीन टीचर का अवार्ड हो या फिर यूनेस्को की तरफ से अवार्ड ही चुनाव तो आज जब यही सोनम मांग चुके की इंडेफिनिटी फास्ट पर बैठे हैं। कुछ तो बहुत सीरियस प्रॉब्लम होगी प्रॉब्लम है।  लद्दाख में डेमोक्रेसी की लद्दाख के पर्यावरण की और लद्दाख के लोगों के राइट्स सभी लद्दाख के लोगों की 4 में डिमांड है।

यहां पर पहले लद्दाख को कांस्टीट्यूशन के दूसरा लद्दाख को फुल स्टेट हुड दिया जाए तीसर लद्दाख की तरफ से 2 एमपी दिए जाएं करेंटली सिर्फ एक एमपी लोकसभा में लद्दाख की तरफ से होता है। और राज्यसभा में जीरो एमपी और चौथा लद्दाख में सरकारी जॉब्स के लिए एक पब्लिक सर्विस कमीशन एस्टेब्लिश किया जाए यह कॉन्स्टिट्यूशन का वह हिस्सा है।

जो देश की ट्राईबल पापुलेशन को प्रोटेक्ट करता है। देश के आदिवासी लोगों को इसके अनुसार ट्राईबलएक हवा देने के लिए आदिवासी लोग अपने खुद के ऑटोनॉमस डिस्टिक काउंसिल और ऑटोनॉमस रीजनल काउंसिल बना सकते हैं। और यह बेसिकली इलेक्टेड बॉडीज है। जिनके पास पावर है।

ट्राईबल एरियाज को एडमिनिस्टर करने की लोकल लेवल पर आदिवासी लोग अपनी जमीन को लेकर अपने जंगलों को लेकर अपने सोशल कल्चरल कस्टम को लेकर अपने कानून खुद बना पाए बाहर के लोग आकर उनकी जमीन एप्लीकेबल है। असम मेघालय त्रिपुरा और मिजोरम की स्टेटस के ट्राईबल एरियाजक्यों डिमांड कर रहे हैं। पहाड़ों  की अपनी नेचुरल बायोडायवर्सिटी होती है। 

नेचर इन द फेस का क्लाइमेट चेंज को एक्सप्लोइट करने दिया गया तो  Ladakh  के लिए बहुत बड़ा खतरा है। नेचुरल डिजास्टर फ्लैश फ्लड्स लैंडस्लाइड इन सब की संख्या बढ़ जाएगी दूसरा लद्दाख की जो मेजोरिटी पापुलेशन है। वह एक्चुअली में शेड्यूल ट्राइब्स की कैटेगरी में आती है। एनसीसी के अनुसार लेह  में करीब 66.8% पापुलेशन शेड्यूल ट्राइब की है। कारगिल में 83% और कुछ एरियाज में 99% तक जाती है।

तीसरा और सबसे बड़ा कारण सिक्स शेड्यूल  Ladakh के लोगों को अपना डेमोक्रेटिक अधिकार देगा। आज के दिन लद्दाख के लोगों के पास डेमोक्रेसी के नाम पर है। क्या खुद ही सोच कर देखिए अगस्त 2019 में जब से आर्टिकल 370 हटाया था।   Ladakh को अलग यूनियन टेरिटरी बना दिया गया जम्मू एंड कश्मीर को अलग यूनियन टेरिटरी हटाने से कोई दिक्कत नहीं थी।

लेकिन उसके साथ-साथ जो सरकार ने किया उससे दिक्कत थी जम्मू एंड कश्मीर पहले एक फूल स्टेट हुआ करता था 2019 के बाद से उसे डाउनग्रेड करके दो अलग-अलग यूनियन टेरिटरीज में बांट दिया यही चीज 370 हटाने से ज्यादा इसका बुरा मानते हैं। बिल्कुल कश्मीर की यूनियन टेरिटरी को तो फिर भी अपनी विधानसभा अपनी लेजिसलेटिव असेंबली मिल गई। लेकिन  Ladakh से तो वह हक भी छीन लिया गया। 

2019 से पहले जब जम्मू एंड कश्मीर की फुल स्टेट हुआ करती थी।  Ladakh से चार मेंबर थे।  लेकिन आज के दिन यह नंबर जीरो बन गया है। यूनियन टेरिटरी है,लेकिन वहां भी स्टेट लेवल पर एक सरकार एक्जिस्ट करती है। जिसे आप वोट दे सकते हो जिसे आप चुन सकते हो वह अलग बात है कि, सेंट्रल गवर्नमेंट दिल्ली सरकार से भी पावर चीन की जबरदस्त कोशिश करी है। पिछले कुछ सालों में लेकिन  Ladakh से पूरा का पूरा हक ही छीन लिया गया है।

स्टेट लेवल पर कुछ है ही नहीं जिसे आप वोट देकर चुन सकूं इससे ऊपर के लेवल लोकसभा की इलेक्शन में वोट डालने जा सकते हैं। लेकिन वहां पर भी उन्हें सिर्फ एक एमपी दिया गया है। शेड्यूल में इंक्लूड करो ताकि हम अपने एडीसी से इसको चुन पेलेजिसलेटिव असेंबली तो दो कि। 

हम अपनी सरकार चुन सके और सेंट्रल लेवल पर हमें दो एमपीएस दो नहीं तो यह डेमोक्रेसी के नाम पर क्या नाटक चल रहा है। दोस्तों की इससे फर्क नहीं पड़ता आप मेरी रीजनिंग से एग्री करो या ना करो क्योंकि,आज से 4 साल पहले बीजेपी ने खुद डिमांड उठाई थी।  Ladakh को सिक्स शेड्यूल में डालने की । 

क्या कारण है सेंट्रल गवर्नमेंट अब इसको पूरा नहीं करना चाहती। यह कारण बड़ा दिलचस्प है। और काफी प्रिडिक्टेबल भी है,अगर आप बीजेपी की पॉलिटिक्स समझते हो तो क्या है। बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में बिल्कुल ऊपर लिखा था कि, हम लद्दाख को सिक्स शेड्यूल देंगे यह देखिए इनको मेनिफेस्टो में क्लीयरली क्या लिखा हुआ है। यह यह शब्द सोनम वांगचुक के एक सभा  को संबोधित करते समय ( मैंने पहले भी दिखाया है।

आज फिर दिखाऊंगा की 2019 में जब यह संसद के चुनाव हो रहे थे। आपने पहले तीन बिंदुओं में लद्दाख को 6th  शेड्यूल में संरक्षित रखने का वादा किया था।  सितंबर 2019 में पहली बार था कि, नेशनल कमिशन फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स ने रिकमेंड किया था। )  Ladakh को सिक्स शेड्यूल में इंक्लूड किया जाए।  लेकिन सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया अगस्त 2020 में लद्दाख के लोगों ने पहली बार अपनी डिमांड सरकार के सामने रखी सितंबर 2020 में इस चीज को लेकर पहले मास् डिस्टिक काउंसिल की इलेक्शंस होनी थी। 

Ladakh में और इलेक्शन से पहले होम मिनिस्टर अमित शाह ने खुद वादा किया कि इलेक्शंस के 15 दिन बाद वह इन डिमांड को पूरा करेंगे।  इसको देखकर प्रोटेस्ट कॉल ऑफ कर दिए गए और बीजेपी ने इलेक्शंस को 15 सीट्स के साथ जीता।  लेकिन उसके बाद फिर कोई एक्शन नहीं लिया गया दिसंबर 2021 नवंबर 2022 देखने को मिले बीच में सरकार के साथ काफी बातचीत भी होगी।  लेकिन मेनिफेस्टो में लिखने के बावजूद सरकार हमेशा इस डिमांड को मना करती रहे। 

यही कारण की आज यह इंडेफिनिटी फास्ट आप देख रहे हो तो ऐसा नहीं है।  कि अचानक से किया जा रहा हूं जैसा आपने देखा पिछले कई सालों से बार-बार लोगों ने अपनी डिमांड्स उठाई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहां पर उठाता है। 

गवर्नमेंट को क्या प्रॉब्लम आ रही है  Ladakh

मोदी सरकार को आखिर दिक्कत क्या है। डिमांड पूरी करने में ऐसा तो नहीं है कि,  Ladakh के लोगों को सिक्स शेड्यूल में ऐड कर दिया गया तो पूरा देश इधर-उधर बुलेट बुलेट हो जाएगा बड़ी सिंपल सी डिमांड है। और कोई नुकसान भी नहीं है। मोदी सरकार का बीजेपी का एक करने में आखिर उन्होंने अपने ही मेनिफेस्टो में खुद लिखा था। यह करेंगे क्या कारण हो सकता है। 

द डिस्ट्रिक्ट एंड रीजनल काउंसिल एडमिनिस्टर द एरिया अंडर देयर जूरिडिक्शन ठे कैन मेक लॉस ओं सर्टेन स्पेसिफाइड मैटर्स लाइक लैंड फॉरेस्ट कैनाल वाटर शिफ्टिंग कल्टीवेशन नोटिस इसका मतलब है।  कि अगर लद्दाख शेड्यूल के अंदर ऐड कर दिया गया तो मोदी सरकार के पास यह पावर नहीं रहेगी लद्दाख की जमीन के ऊपर इसका मतलब  Ladakh की जमीन को लद्दाख के जंगलों को प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को नहीं बेच  सकते हैं। 

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वह तो यह चाहते थे कि, यहां के हर घाटी में खनन हो मीनिंग हो उद्योग लगे और  Ladakh के लोगों को इसी बात का डर था। सोनम वांगचुक को और  लद्दाख के लोग नहीं चाहते कि, उनकी जमीन को कॉर्पोरेट एक्सप्लोइटेशन के लिए ओपन  हो अगर ऐसा हुआ तो वहां के लोगों से उनका अधिकार छीन लिया जाएगा। बल्कि देश के पर्यावरण के लिए भी बहुत खतरनाक होगा ( Ladakh ) लद्दाख एक बेहद सुंदर लेकिन इकोलॉजिकली सेंसिटिव हिस्सा है।

देश का यहां के पहाड़ यहां की वादियां इतनी अनोखी है। जैसी दुनिया की सबसे रेयर और एंडेंजर्ड एनिमल्स स्पीशीज यहां पर पाई जाती है। जैसे कि स्नो लेपर्ड या तिब्बती का पानी इतना क्रिस्टल क्लियर इतना साफ है। कि देखकर यकीन नहीं होगा कि, इतनी सफाई भी कहीं हो सकती है।  तो आप जानते होंगे कि यहां के लोग कितने भोले और कितने साफ दिल के हैं।  इन लोगों का कल्चर ट्रेडीशन यह मॉनेस्ट्रीज और यह फेस्टिवल्स इतने बेहतरीन है कि, दुनिया भर से लोग आते हैं।

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