नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्म से ले कर मृत्यु का जीवन सफर

BY MANJEET         23/01/2024 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1887 को बंगाल के प्रांत उड़ीसा डिवीजन कटक समर्थ परिवार में हुआ। 16 अगस्त 1945 वर्ल्ड वॉर 2 खत्म होने की कगार पर थी जापान ने हथियार डालकर सरेंडर कर दिया था। और जर्मनी में हिटलर ने खुदकुशी करके अपनी जान ले ली थी। जर्मनी और जापान दोनों ही देश बुरी तरीके से नेताजी सुभाष चंद्र बोस जो 1943 से ही मदद ले रहे थे। जापान से इंडियन नेशनल आर्मी लीड करते वक्त नए तरीकों की तलाश में थे। 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्म से ले कर मृत्यु का जीवन सफर
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्म से ले कर मृत्यु का जीवन सफर

कि कैसे आजादी की लड़ाई को बरकरार रखा जा सके हालांकि यह प्लांट्स लिखित रूप से स्पष्ट नहीं थे। लेकिन उनके साथ ही जानते थे, कि नेताजी अपना बेस अब सोवियत यूनियन में शिफ्ट करना चाहते हैं। उनका प्लान था, कि पहले वह टोक्यो जाकर जापानी सरकार को धन्यवाद करेंगे और वहां से वह सोवियत की ओर रवाना हो जाएंगे। सोवियत यूनियन हाईलाइट फोर्सज का हिस्सा थी। वह देश जिन्होंने इस वार को जीत जैसे एलिट देश से कम्युनिस्ट काफी अलग विचारधारा के चलते नेताजी को उम्मीद थी।

कि वह ब्रिटिश के खिलाफ खड़े होने में इंडिया की मदद करेंगे लेकिन प्रॉब्लम यह थी। जापान अभी-अभी इस जंग को हरा था। और दो बड़े हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए जाने के लिए कोई ऑप्शंस की भरमार नहीं थी। एक रास्ता ढूंढ कर निकाल हवाई जहाज में बैठेंगे जो वियतनाम में साईगान से टेक ऑफ करेगा ताइवान के हाथों में फिर वहां से ताई हुकु का मौस जाएगा जो कि आज के दिन का ताइवान है। ताइवान के देश में फाइनली टोक्यो अपनी फाइनल डेस्टिनेशन पहुंचने से पहले उन दिनों मंचूरियन जापान स्टेट हुआ करता था।

मंचू को नाम से लेकिन 9th अगस्त से सोवियत यूनियन ने इस जगह पर एंडेड करना शुरू कर दिया था। नेताजी इस बात को जानते थे, इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों ना सोवियत से अपना पहला कांटेक्ट इस मंजू को में ही एस्टेब्लिश किया जाए 17 अगस्त की सुबह बैंकॉक से निकलते हैं।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्लेन क्रश की पूरी कहानी 

अपने तीन ग्रुप के साथ और करीब 10:00 बजे वियतनाम में पहुंचते हैं। की है,वी बंबर हवाई जहाज में तो सिर्फ दो लोगों के बैठने की जगह खाली बच्ची तो नेताजी अपनी इंडियन नेशनल आर्मी के सभी साथियों के साथ सफर में आगे नहीं जा सकते। सिर्फ किसी एक और को चुनना पड़ेगा वह डिसाइड हैं। हबीबी रहमान के साथ इस जर्नी को पूरा करेंगे और करीब 12 से 13 लोग प्लेन में बैठे थे नेताजी और कर्नल हबीबुर रहमान के अलावा बाकी सभी लोग जापानी मिलिट्री के थे।

या जापानी क्रू मेंबर्स क्योंकि अंधेरा जल्द ही होने वाला था। इसलिए यह प्लेन एक अंश शेड्यूल स्टॉप करता है। कुरान पर जो कि आज के दिन का दानाग शहर है।और करू काम करता है। इस प्लान को हल्का बनाने पर बहुत से हथियार लेमिनेशन मशीन गन से प्लेन से उतारे गए ताकि इस प्लान को हल्का बनाया जा सके।लंबे सफर के लिए 5:00 बजे पायलट अपने अगले शेड्यूल स्टॉप है। तो को स्कीप कर देते हैं। स्टॉप था, जहां पर प्लेन को लगभग दोपहर के 12:00 बजे लैंड किया जाता है।

2 घंटे के स्टॉप में सभी पैसेंजर्स लंच करते हैं। और प्लेन को रिफ्यूट किया जाता है। प्लेन की टेस्टिंग के दौरान एक समय पर पायलट और इंजीनियर को दिखा की प्लेन की लिफ्ट इंजन में कुछ खराब है।ज्यादा जांच पड़ताल नहीं करी उन्होंने सोचा ठीक ही होगा क्योंकि नया नया इंजन लगाया। प्लेन 18 अगस्त को दोपहर के 2:00 बजे प्लेन दोबारा से उड़ान भर लेता है। अगस्त को दोपहर के 2:00 बजे प्लेन दोबारा से उड़ान भर लेता है।

की आवाज सभी को सुनाई लगता है और कुछ ही सेकंड बाद जाकर क्रश कर जाता है। प्लेन में जो लोग आगे बैठे थे। पायलट को पायलट और जापानी जनरल मारे जाते हैं। जनरल के पीछे पास प्लेन के पेट्रोल टैंक के बगल में बैठे थे नेताजी और उनके पीछे बैठे थे।हबीबुर रहमान प्लेन से जिंदा बाहर निकलते हैं लेकिन नेताजी गैसोलीन बीगे थे प्लेन का पीछे का दरवाजा खुला नहीं रहा था।  तो यह आगे की एंट्रेंस से बाहर निकलते हैं। और ऐसा करने का मतलब था कि।

आज की आग की लाफ्टर के बीच में से गुजरा हो और नेताजी क्योंकि पेट्रोल से पूरा बिक चुके थे। इंसटैंटली जल जाते हैं।  कपड़े निकाल कर आग बुझाते हैं। और 15 मिनट के अंदर अंदर नेताजी को पास के में मोहन मिलिट्री हॉस्पिटल में ले जाते हैं। लेकिन अनफॉर्चूनेटली नेताजी की जान बचाने में यहाँ अनसक्सेसफुल रहते हैं।  नेताजी सुभाष चंद्र बोस का ध्यान इस हॉस्पिटलक्रश किए दर्दनाक कहानी आज भी कुछ लोगों के लिए सिर्फ एक कहानी ही है।

कुछ लोगों का मानना है कि,  नेताजी एक्चुअली में सोवियत यूनियन पहुंच गए थे। और वहां इन्हें बंदी बनाया गया पूरी जिंदगी टॉर्चर किया गया दूसरी तरफ दिखावा था। नेताजी असल में जिंदा थे। और वह अपना रूप बदलकर वापस इंडिया लौटे थे। अयोध्या में वह एक बाबा बन गए और बाकी की जिंदगी एक बाबा के रूप में बताएं गुमनामी बाबा इतनी बड़ी मिस्ट्री क्यों है। इस पर जो इन्वेस्टिगेशन करी गई उनमें क्या पाया गया यह समझते हैं।

एक्सीडेंट पर जिसको हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है। नेताजी की मृत्यु की बात करते समय 15 नवंबर 1945 को नेताजी के देहांत के करीब ढाई महीने बाद की बात है। नेताजी के सोल्जर को ब्रिटिश के द्वारा कैप्चर कर लिया जाता है।  लगभग 25000 इन के सोल्जर ब्रिटिश हुकूमत की गिरफ्तारी में थे। 25000 में से तीन जवानों पर रेड फोर्ट (लाल किला) में इस दिन एक खुलेआम मुकदमा शुरू हो रहा था।

तीन सोल्जर बड़े खास द कैप्टन शाहनवाज खान लेफ्टिनेंट गुरबख्श सिंह ढिल्लों और कैप्टन प्रेम कुमार सहगल पिछले कुछ सालों में जो भी संघर्ष नेताजी ने किया था।  ब्रिटिश अंपायर ने बड़ी ही चालाकी से सभी खबरों को दबाकर रखा था। सभी खबरों को दबाकर रखा था। इन के बारे में इसका मतलब ज्यादातर इंडियन जानते नहीं थे।

एक्चुअल में की नेताजी ने क्या-क्या किया था।आप लेकिन अक्षर कर लिया जाता है। ब्रिटिश के द्वारा तो ब्रिटिश सरकार डिसाइड करती है कि, इन ट्रायल्स को हाली पब्लिक साइज तरीके से जनता के सामने दिखाई जाए देशभर की खबर फैलते हैं। क्योंकि इन यहां पर हमला बोला था, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने यहां पर सरकार को देश के साथ रिलेट कर दिया है। लेकिन यह प्लान पूरी तरीके से फैल हो जाता है। इसका एक्जेक्टली उल्टा ही होता है।

प्रदर्शनकारियों की भीड़ ज्यादातर लोगों को दिखता है। कि जिन लोगों को सरकार देशद्रोही कह रही है। वह तो सबसे बड़े देश भक्त है। एक्चुअली में लोग सड़कों पर उतर जाते हैं। प्रोटेक्ट करके आम जनता जोरों से अपनी आवाज उठाती है। इन लोगों के खिलाफ कोई सजा नहीं होनी चाहिए।

दिलचस्प बात यह थी, यह तीन ऑफिसर तीन धर्म से बिलॉन्ग करते थे, सहगल हिंदू,खान मुसलमान,और ढीली एक सिख इंडिया की तीन मेजर रिलिजियस कम्युनिटीज जर्मनी जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी में देखने को मिलती थी।

यह तीन सोल्जर रिलिजियस और नेशनल यूनिटी का एक सिंबल बन गए इन तीनों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया बीजिंग वर अगेंस्ट थे नेशन का यानी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ राजद्रो 1215 आईपीसी साथ ही साथ मर्डर और अमेंडमेंट तो मर्डर का भी चार्ज लगाया गया। लेकिन इस पूरे समय में कांग्रेस पार्टी क्या कर रही थी। कांग्रेस डिफेंस कमेटी की स्थापना करती है।

इन तीन सोल्जर को डिफेंड करेंगे कोर्ट में डिफेंस कमेटी बनाई जाती है।इसमें आसफ अली और जवाहरलाल नेहरू खुद प्रोफेशनल हुआ करते थे। काफी सालों से उन्होंने लॉयर का गाउन पहना नहीं था। लेकिन इस मुकाम पर वह वापस से लॉयर के रूप में कोर्ट में पेश होते हैं। की जो प्रोविजनल सरकार लॉयर के रूप में कोर्ट में पेश होते हैं।

की जो प्रोविजनल सरकार आजाद हिंद की नेताजी ने बनाई थी और यह जो इंडियन नेशनल आर्मी है। इंटरनेशनल लॉ के तहत इसमें कुछ भी गलत नहीं क्योंकि आजाद हिंद नाम की यहां पर एक स्टेट बनाई गई थी।  जिसकी खुद की आर्मी थी। जो लड़ रही थी।  थर्ड जनवरी 1946 को जब कोर्ट का फैसला सुनाया जाता है। 

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मनमोहन सरकार में नेताजी केस दोबारा 

फाइनली मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट 6 साल बाद निकाल कर आती है। 8th नवंबर 2005 को और मैं 2006 में जब इस रिपोर्ट को इंडियन पार्लियामेंट में सबमिट किया जाता है। तो पार्लियामेंट इस रिपोर्ट को रिजेक्ट कर देता है। रिजेक्शन का रीजन ओबवियस था। इस समय तक कांग्रेस की यूपीएस सरकार पावर में आ चुकी थी जो अफवाह की कंस्पायरेसी कि वह कंटिन्यू रहने वाली थी।क्योंकि लोगों का कहना था

इसलिए रिपोर्ट को रिजेक्ट ही किया जाएगा लेकिन मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट को अगर आप सच भी मान लो यह कहो कि प्लेनक्रिएशन ने कुछ भी नहीं कहा इसके रिगार्ड लोगों की अगली उम्मीद थी। क्लासिफाइड फाइल्स बहुत सी फाइल है। पुरानी जिन्हें इंडियन सरकार के द्वारा क्लासिफाइड रखा गया है।  जनता के सामने प्रजेंट नहीं किया गया। 

मोदी सरकार क्या कहती है नेताजी के बारे में 

 इन फाइलों में कुछ सच छुपाओ 2016 तक मोदी सरकार पावर में आ चुकी थी। तो 304 फाइलों को दी क्लासिफाइड किया जाता है। सरकार के द्वारा और यह चीज पार्लियामेंट में अनाउंस की जाती है। 2 मार्च 2016 को पब्लिक के सामने पेश नहीं की गई थी। क्लासिफाइड किया था। जैसे की पहली एचडी देवी घोड़ा की सरकार 1997 में 990 फाइलों को दी क्लासिफाइड किया गया। उसके बाद मनमोहन सिंह जी की सरकार ने 2012 में करीब 1000 फाइलों को दी क्लासिफाई किया था।

कि सरकार ने मिनिस्ट्री आफ डिफेंस की फाइलों को मोस्टली दी क्लासिफाइड किया था। मनमोहन सिंह जी की सरकार ने मोस्टली होम एंड डिफेंसमिनिस्ट्री की फाइलों को दी क्लासिफाई किया था। 2016 मेंमिनिस्ट्री आफ एक्सटर्नल अफेयर्स और कैबिनेट सेक्रेटरी की फाइल्स को दी क्लासिफाई किया था।  फाइलों की इसमें एक फाइल मौजूद थी, इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की थी।

इंडियन इंडिपेंडेंस लीग ने अपनी एक अलग इन्वेस्टिगेशन करी थी। नेताजी की डेथ में 1953 में एक रिपोर्ट सबमिट हुई थी। इसको लेकर सामने आती है, रिपोर्ट में यह कहा गया है कि, प्लेन क्रैश थ्योरी सच थी।लेकिन कहा गया है कि, इस प्लेन क्रैश को करवाया गया था। जापानी सरकार के एक अधिकारी के द्वारा  शुरू में मैंने बताया था।  कि कैसे नेताजी बैंकॉक से साइन कौन गए थे।

अपने 6 इन साथियों के द्वारा लेकिन उन्हें कहा गया कि सिर्फ दो लोग ही बैठ सकते हैं। सिर्फ दो लोगों की जगह इस रिपोर्ट के अनुसार यह कैलकुलेटेड प्लान था। जापानी सरकार में कुछ लोग थे जो इस प्लान को क्रश करवाना चाहते थे। क्लासिफाइड किया मोदी सरकार ने बाकी देशों को भी बोला कि आप भी अपनी अपनी फाइलें दी क्लासिफाइड कर लो जो भी सुभाष चंद्र बोस से रिलेटेड है।

तो रिस्पांस में ऑस्ट्रिया, जर्मनी, रूस, यूके, और उस इन सारे देशों ने अपनी सभी फाइलें नेताजी से रिलेटेड पब्लिक डोमेन पर डाल दी।  इन सभी ने अपनी फाइलों को दी क्लासिफाई कर दिया था।लेकिन यहां भी एक देश ऐसा था। जापान जिसने सारी सीक्रेट फाइलों को दी क्लासिफाई नहीं किया बात सीक्रेट फाइल थी। 

जापान के पास दो को जरूर दी क्लासिफाई कर दिया जिसमें वही चीज़ लिखी गई थी प्लेन क्रैश हुआ था वहीं से डिस्क्रिप्शन करी गई थी।  लेकिन आज के दिन तक तीन ऐसी क्लासिफाइड फाइल्स है। जापान के पास जिन्हें जापान में पब्लिक के सामने रिलीज नहीं किया नहीं करना एक्सप्लेन क्रश को कुछ जापानी लोगों के द्वारा करवाया गया था।

बिना और सबूत के मैं यहां कुछ कंक्लुजन ड्रॉ नहीं करना चाहूंगा यह चीज हमें तभी पता लग सकती है। जब और सबूत मिले इस चीज को लेकर इतना जरूर कहूंगा की चीज लगती है। जिस तरीके से यह तीन फाइलों को दी क्लासिफाइड नहीं किया गया है। लेकिन सच हो या ना हो एक बात जरूर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का देहांत इस प्लेन में  हुआ था।

यह चीज हमको एक बीजेपी मेंबर रहे  सितंबर 2023 तक उन्होंने कहा कि उनके परिवार रिग्रेट करता है। कि सालों तक यह कंस्पायरेसी थिअरीज में बिलीव करते रहे जो हमें एक्सेप्ट करना पड़ेगा। यह सच की नेताजी का देहांत उसे एयर क्रैश में ही हुआ था। यह नेताजी के लिए एक इंसल्ट है।  

नेताजी का प्लेन क्रैश आखिर क्यों हुआ था 10 इन्वेस्टिगेशन 

 1945 और 1974 के बीच में 10 अलग-अलग इन्वेस्टिगेशन हुई थी। इसको लेकर ब्रिटिश आर्मी के द्वारा जापान के द्वारा ब्रिटिश इंडिया  सरकार के द्वारा ताइवान की सरकार के द्वारा इंडिपेंडेंट इंडिया की सरकार के द्वारा और इसके अलावा इंडिविजुअल जर्नलिस्ट ने भी अपनी इन्वेस्टिगेशन करी थी।  और सभी इन्वेस्टिगेशन एक ही कंक्लुजन पर पहुंचती है। वही पॉइंट्स जिन्हें शाहनवाज कमीशन की रिपोर्ट में मेंशन किया गया था। यही मानना है।

नेताजी की इकलौती बेटी अनिता बोस का भी ऑसम मेड अवेलेबल थे डॉक्यूमेंटेशन विच प्रूफ दैट हे डाइड इन फैक्ट ओं अगस्त 18th 1945 इन एन एयर क्रैश अवर्स इन ए कंसीक्वेंस का क्रश इन व्हाट इस नो टाइम ओं नेताजी का खुद का परिवार एंड कंस्पायरेसी थिअरीज में विश्वास नहीं करता। इन हवाओं को डिजरिस्पेक्टफुल मानता है। तो कम से कम हम तो इतना कर ही सकते हैं। कि पॉजिटिव खबरों को फैलाना बंद कर दे नेताजी को अगर हमें सम्मान देना है। तो उनकी वैल्यू से हमें सीखना चाहिए उनकी कहानी से हमें इंस्पिरेशन लेनी चाहिए ना कि यह कंस्पायरेसी फैलानी नहीं फैलाना चाहिए।

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