सैम बहादुर sam bahadur : 1971 के युद्ध के हीरो और पहले फील्ड मार्शल

सैम बहादुर : इनका पूरा नाम सैम हॉरमुसजी फेमजी जमशेदजी मानेकशॉ था। 1971 में जब भारत-पाकिस्तान की लड़ाई हुई थी उस समय ये भारतीय सेना के अध्यक्ष थे। सैम बहादुर फील्ड मार्शल का पद धारण करने वाले पहले भारतीय सैन्य अधिकारी थे।

सैम बहादुर को उनके बलिदान के लिए पद्म विभूषण, पद्म भूषण और सैन्य क्रॉस जैसे बेहद ही सम्मानित अवॉर्ड दिए जा चुके हैं। ये 8 जून 1969 से लेकर 15 जनवरी 1973 तक भारतीय सेना के आठवें अध्यक्ष रहे।

सैम बहादुर sam bahadur : 1971 के युद्ध के हीरो और पहले फील्ड मार्शल
सैम बहादुर sam bahadur : 1971 के युद्ध के हीरो और पहले फील्ड मार्शल

सैम बहादुर का आरंभिक जीवन

सैम का जन्म एक पारसी परिवार में 3 अप्रैल, 1914 को हुआ था। इनका परिवार अमृतसर ( पंजाब ) में रहता था। इनके पिताजी का नाम हॉरमुसजी मानेकशॉ था जोकि पेशे से एक डॉक्टर थे। इनकी माता जी का नाम हिला नी मेहता था ये एक गृहणी थी। सैम बहादुर 6 भाई बहन थे, जिनमे सैम पांचवें नंबर पर थे।

सैम बहादुर ने 22 अप्रैल 1939 में मुंबई में सिल्लों से शादी की। इनकी दो बेटियाँ शेरी और माया हुई। सैम 15 जनवरी 1973 को सेना से सेवानिव्रत हुए। बाद में इन्हे निमोनिया और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियाँ हो गई थी जिसके बाद वे कॉम में चले गए थे और 94 वर्ष की उम्र में 27 जून 2008 को तमिलनाडु के वेलिंगटन के सैन्य अस्पताल में इनकी मौत हो गई थी।

इन्होंने 1 अक्टूबर 1932 को देहरादून से इंडियन मिलिट्री एकेडमी में शामिल हुए। 4 फरवरी 1934 को सैम बहादुर का चयन ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर हुआ। यहीं से इनका सैनिक जीवन शुरू होता हैं।

सैम बहादुर का सैनिक जीवन

सैम जी ने भारतीय सेना में बेहद ही बहादुरी के साथ अपनी सेवा दी थी। इनके साहस के कारण ही इनको सेना के पहला फील्ड मार्शल भी बनाया गया था। अपनी पूरी सेवा के दौरान उन्हे 3 बार पाकिस्तान और एक बार चीन से युद्ध करना पड़ा था। इन सभी अहम जिम्मेदारियों के साथ-साथ सैम बहादुर ने दूसरे विश्व युद्ध में भी अपने साहस का परिचय दिया था।

दूसरे विश्व युद्ध में जब भारत की सेना बर्मा में थी तो वहाँ भी इन्होंने पूरी बहादुरी का परिचय दिया था। ये जिस कंपनी को लीड कर रहे थे उसके कम से कम आधे से ज्यादा सैनिक मारे जा चुके थे। इसके बाद भी सैम ने युद्ध में जापानी सेना का बहादुरी के साथ मुकाबला किया और जीत भी हासिल की।

इस युद्ध में सबसे महत्त्व का स्थान पगोडा हिल था जिस पर जीत हासिल करने के लिए ही दोनों तरफ से हुई फ़ाइरिंग में सैम जखमी भी हो गए थे। इनको गंभीर हालत में रंगून के अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां डॉक्टर ने इनके बचने के चांस बहुत ही कम या यू कहे की न के बराबर बताए थे। लेकिन अपनी इच्छाशक्ति के बल पर सैम ने मौत को भी हरा दिया था।

इनका सबसे एतिहासिक युद्ध 1971 का भारत-पाकिस्तान का युद्ध था। इस समय ये भारतीय सेना के प्रमुख थे। इस युद्ध के समय देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम जी से युद्ध की तैयारी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा था की अभी उनकी सेना युद्ध के लिए तैयार नहीं हैं।

इस युद्ध में भारतीय सेना ने बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी सेना का साथ दिया था। दिसंबर में जब सैम बहादुर ने सरकार को बताया कि युद्ध के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार हैं, तो यह उनकी कुशल रणनीति का ही परिणाम था कि केवल 15 दिन के युद्ध में लगभग 1 लाख पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के आगे घुटने टेक दिए थे।

अब बन रही हैं सैम बहादुर पर फिल्म

देश के पहले फील्ड मार्शल के जीवन से लोगों को रु-ब-रु कराने के लिए विक्की कौशल की नई फिल्म ” सैम बहादुर ” लोगों के बीच 1 दिसंबर 2023 को आ चुकी हैं। इस फिल्म में कुछ ही समय में सैम के पूरे जीवन को बेहद ही जीवंत तरीके से रंगीन परदे पर उतारा गया हैं।

इस फिल्म में सैम के जन्म से लेकर उनकी मौत तक के बीच के उनके साहसिक जीवन को बेहद अच्छे तरीके से परदे पर रखा गया हैं। फिल्म आपको शुरू से अंत तक एक धागे में पिरो कर रखती हैं। देशभक्ति की भावना और जोश पूरी फिल्म में आपको जोड़े रखेगा।

इस फिल्म में विक्की कौशल सैम बहादुर का किरदार निभा रहे हैं। जिन्होंने इस किरदार के साथ बिल्कुल न्याय किया हैं। इनके अलावा फिल्म में सान्या मल्होत्रा, फातिमा सन शेख, नीरज काबी और मोहम्मद जीशान अयूब आदि कलाकार प्रमुख हैं।

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