डार्क पैटर्न क्या हैं, आइए जाने कैसे ये ग्राहकों को अपने झांसे में फसाता हैं?

BY MANJEET

डार्क पैटर्न : डार्क पैटर्न के झांसे में कभी न कभी ग्राहक जाने-अनजाने में आ ही जाते हैं। इसे एक प्रकार से हम “भ्रामक पैटर्न” भी कह सकते हैं क्युकी असल में यह ग्राहकों को भ्रम में ही डालता हैं। डार्क पैटर्न के माध्यम से ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहकों को केवल चूना ही लगाती है और उनसे उनकी काफी निजी जानकारी भी प्राप्त कर लेती हैं।

डार्क पैटर्न क्या हैं, आइए जाने कैसे ये ग्राहकों को अपने झांसे में फसाता हैं?
डार्क पैटर्न क्या हैं, आइए जाने कैसे ये ग्राहकों को अपने झांसे में फसाता हैं?

डार्क पैटर्न को ग्राहकों के लिए एक प्रकार का स्कैम माना जाता हैं। यह प्रलोभन ऑनलाइन शॉपिंग में दिया जाता हैं कि फला वस्तु खरीदने पर आपको इतने प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा। जबकि असलियत इस से कही अलग होती हैं। अब सरकार ने इस पर रोक लगाते हुए कुछ दिशा-निर्देश जारी किये हैं।

क्या होता हैं डार्क पैटर्न

ऑनलाइन शॉपिंग के लिए बनी कई कंपनिया और वेबसाईट अपना समान बेचने के लिए ग्राहकों को लुभाती हैं। वे उन्हे कई प्रकार के डिस्काउंट ऑफर देती हैं, जिस से ग्राहक उनके जाल में फस जाता हैं। डार्क पैटर्न को कंपनियां इस तरह से डिजाइन करती हैं कि ग्राहक न चाहते हुए भी उनके झासे में फस जाता हैं।

हम आपको एक उदाहरण से इसे समझते हैं। मान लीजिए की आप ऑनलाइन शॉपिंग के लिए कुछ सर्च करते हैं, लेकिन वेबसाईट आपको थोड़ी ही देर में किसी ऐसे पेज या साइट पर ले जाती हैं और ऐसी आकर्षक तरीके से तैयार की गई वस्तुएं दिखाती हैं जिनके बिकने में उनका ज्यादा फायदा होता हैं।

फिर ग्राहक भी उस वस्तु के फोटो के साथ लिखे गए डिस्काउंट ऑफर को देखकर लालच में आ जाता हैं और झांसे में आकर उस वस्तु को खरीद लेता हैं, जिस से ग्राहक को कही-न-कही नुकसान और ई-कॉमर्स कंपनियों को काफी फायदा होता हैं। ये प्लेटफॉर्म ग्राहक से उसकी मेल सहित कई अन्य बेहद गोपनीय जानकारी उस साइट पर जमा करवा लेती हैं। जिस से ग्राहक की निजता पर भी ग्रहण लगता हैं।

डार्क पैटर्न के प्रकार

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नौ प्रकार के डार्क पैटर्न के बारे में पता लगाया हैं जिनका वर्णन इस प्रकार हैं:

  1. झूठा विज्ञापन : इसमे असली वस्तु के समान दिखने वाली हू-बू-हू वस्तु को तैयार किया जाता हैं और ग्राहक को प्रलोभित किया जाता हैं। ऐसा समाचार में लेख देकर भी किया जाता हैं।
  2. सदस्यता दिलवाना : इस प्रकार की ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहकों को लालच देकर उनसे किसी भी प्रकार की सदस्यता दिलवा लेते हैं लेकिन उस सदस्यता को छोड़ना ग्राहक के लिए सिरदर्द बन जाता हैं।
  3. प्रलोभन देना : ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां ग्राहकों को प्रलोभन किसी काफी उच्च गुणवत्ता की सेवा का देते हैं जबकि असल में वह सेवा बेहद ही निम्न स्तर की निकलती हैं।
  4. आलोचना : लगातार आलोचना, शिकायतें और कारवाई के लिए अनुरोध करना लेकिन उस पर कोई अमल नहीं किया जाता।
  5. अद्रश्य लागतें : ये कंपनियां ग्राहकों से वास्तविक लागत और कीमत छुपा कर उन्हे अपने जाल में फंसा लेती हैं। लेकिन बाद में ग्राहक को जब पता चलता हैं तो वह इनसे बाहर नहीं निकल पाता।
  6. बहुत ज्यादा सूचना लेना : ई-कॉमर्स कंपनियां अपने ग्राहकों से धीरे-धीरे करके बेहद ही गुप्त जानकारी भी ले लेती हैं और उनसे कही भी साइन-इन भी करवा लेती हैं। ऐसे वे ग्राहक को भरोसे में लेकर करती हैं लेकिन कई भी इन जानकारियों का गलत इस्तेमाल भी किया जाता हैं।
  7. बास्केट स्नीकिंग : ग्राहक की सहमति के बिना शॉपिंग एप के कार्ट में अतिरिक्त उत्पाद या सेवा जोड़ें के लिए भी कंपनियों द्वारा डार्क पैटर्न का इस्तेमाल किया जाता हैं।
  8. झूठी तात्कालिकता : ग्राहक में खरीददारी को बाधित करने की तात्कालिकता या कमी की भावना पैदा करना।
  9. उपभोक्ता का शोषण : कई बार ये कंपनियां ग्राहक को उनके दृष्टिकोण के अनुसार न चलने पर उनके खिलाफ आलोचना का रास्ता अपनाते हैं।

कुछ बड़ी कंपनियों द्वारा डार्क पैटर्न का उपयोग

एप्पल, अमेजन, स्काइप, फ़ेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और यह तक की गूगल जैसी बड़ी कंपनियां भी डार्क पैटर्न का प्रयोग करती हैं। अमेजन के विडिओ सबसक्रिप्शन के लिए जब साइन-इन किया जाता हैं वह प्रक्रिया बेहद ही जटिल और भ्रामक हैं जिसके कारण इसे बेहद आलोचना का शिकार होना पड़ा हैं।

आप यूट्यूब को देखे जब भी हम यूट्यूब देखते हैं तो वह ग्राहकों को बार बार एक मेसिज दिखाता कि आप ये सब्स्क्रिप्शन ले ताकि आप यूट्यूब का और अच्छे से उपयोग कर सके। ऐसे करके वह अपना फायदा करता हैं।

भारत सरकार ने लगाया डार्क पैटर्न पर प्रतिबंध

ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा प्रयोग किये जा रहे ” डार्क पैटर्न ” पर प्रतिबंध लगा दिया हैं। साथ ही इसका उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस बारे में केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा 30 नवंबर 2023 को इसके रोकथाम के लिए एक गजट अधिसूचना जारी कर दी थी।

यह अधिसूचना डार्क पैटर्न की रोकथाम और उसके प्रयोग को नियमत करने के लिए दिशा-निर्देशों से संबंधित हैं। यह भारत में सामान और सेवा देने वाले सभी प्लेटफ़ॉर्म और विज्ञापन देने वाले और अन्य कोई ऑनलाइन उत्पाद बेचने वालों पर लागू होगी।

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विश्व में क्या क्या प्रयास हुए हैं डार्क पैटर्न को लेकर
  • संयुक्त राष्ट्र ने अप्रैल 2019 में इस संबंध में नियम बनाए थे जिन्हे डेटा संरक्षण अधिनियम,2018 के तहत लागू किया गया।
  • मार्च 2021 में कैलिफोर्निया उपभोक्ता गोपनीयता अधिनियम में संशोधन पारित किया गया ताकि ग्राहकों के अधिकारों को नुकसान पहुचाने वाले डार्क पैटर्न पर रोक लगाई जा सके।